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2.4 — Integers

एक integer (या integral) type variable, ऐसा variable होता है जो केवल non-fractional numbers या पूर्णांक संख्याएँ ही store कर सकता है (जैसे -2, -1, 0, 1, 2) । C++ में हमारे इस्तेमाल के लिए five अलग-अलग fundamental integer types उपलब्ध हैं:

Category Type Minimum Size Note character char 1 byte integer short 2 bytes . . . → Read More: 2.4 — Integers

2.3 — Variable के sizes और sizeof operator

जैसा की आपने lesson 2.1 — Basic addressing और variable definition में देखा, आधुनिक machine में memory byte size के इकाइयों में व्यवस्थित होती है जिसमे से प्रत्येक इकाई (unit) का एक अद्वितीय memory address होता है । अभी तक, memory को mailboxes, जहाँ हम information store कर सकते हैं और उपयोग के अनुसार वापस . . . → Read More: 2.3 — Variable के sizes और sizeof operator

2.2 — Void

Void को समझना और समझाना शायद सबसे आसान है । आसान शब्दों में कहा जाये, तो इसका मतलब है “कोई data type नहीं”!

Void कई अलग-अलग जगहों पर काम आ सकता है:

1) ये बताने के लिए की function कोई value return नहीं करेगा:

2) या फिर ये बताने के लिए की function कोई . . . → Read More: 2.2 — Void

2.1 — Basic addressing और variable का definition

Memory को address करना

ये lesson “1.3 — Variables, initialization, और assignment पर एक नज़र” section के आधार पर बनाया गया है । Variables के पिछले lesson में हमने जाना की variables memory के टुकड़े का एक नाम है जिसमे information store किया जा सकता है । संक्षिप्त रूप में कहा जाये, तो computers . . . → Read More: 2.1 — Basic addressing और variable का definition

1.12 — Chapter 1 comprehensive quiz

Question 1

एक single-file program लिखें (इसे main.cpp नाम दे) जो user से दो अलग-अलग integers लेता हो, उन्हें जोड़ता हो और फिर result output करता हो । Program 3 functions use कर रहा होना चाहिए:

एक “readNumber” नाम का function जो user से integer लेकर caller को return करेगा । एक “writeAnswer” नाम का . . . → Read More: 1.12 — Chapter 1 comprehensive quiz

1.11a — आपके program को debug करना (variables और call stack पर नज़र रखना )

पिछले lesson Stepping और breakpoints में हमने सीखा की debugger की सहायता से हम program के execute होने के path पर कैसे नज़र रख सकते हैं । फिर भी, program में stepping करना debugger की केवल आधी खूबियों को दर्शाता है । Debugger stepping करते वक़्त हमे variables के value की जाँच करने की भी . . . → Read More: 1.11a — आपके program को debug करना (variables और call stack पर नज़र रखना )

1.11 — आपके program को Debug करना (stepping और breakpoints)

Syntax और semantic errors

Programming काफी मुश्किल हो सकता है, और आप programs लिखने समय कई तरह की गलतियाँ कर सकते हो । Errors मुख्यतः दो तरह के होते हैं: syntax errors, और semantic errors (logic errors) ।

Syntax error program में तब आते हैं, जब आपका लिखा हुआ कोई statement C++ के grammar के . . . → Read More: 1.11 — आपके program को Debug करना (stepping और breakpoints)

1.10a — आपका पहला program कैसे design किया जाये

अब आप programs के basics को समझ चुके हैं, आइये अब ज़रा करीब से देखें की program को design कैसे किया जाये । जब आप program लिखने वाले होगे, आपके पास ज़रूर कोई ना कोई problem होगा जिसे आप उस program के ज़रिये solve करना चाहते हैं । नए programmers अकसर इस बात का सही . . . → Read More: 1.10a — आपका पहला program कैसे design किया जाये

1.10 — Preprocessor और header guards पर एक नज़र

Preprocessor को समझने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा, की आप इसे एक बिलकुल अलग program के रूप में देखें, जो आपके program के compile होते वक़्त आपके compiler से पहले run करता है । Preprocessor का तात्पर्य directives को process करने से है । Directives विशेष तरह के instructions होते हैं, जो # symbol . . . → Read More: 1.10 — Preprocessor और header guards पर एक नज़र

1.9 — Header files

Headers, और उनका तात्पर्य

जैसे-जैसे program बड़ा होता जाता है (या इसमें और ज्यादा files जुड़ने लगते हैं), हर एक function जो किसी दुसरे file में स्थित हो, को forward declare करना बड़ी जल्दी ही थकाऊ काम बन जाता है । क्या ये एक बेहतर उपाय नहीं होगा की आप सभी forward declarations को एक . . . → Read More: 1.9 — Header files